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बोरिंग वन विभाग ने खोदा, सुधार कार्य भी वही करेगा”: सरपंच के इस अड़ियल रुख के बीच प्यासे मर रहे बड़ीपारा के ग्रामीण।
गरियाबंद। मैनपुर.भीषण गर्मी के इस दौर में जहां ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, वहीं गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड से लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत अमाड़ के आश्रित ग्राम देवझरआमली बड़ीपारा में पिछले 20 से 25 दिनों से सरकारी बोरिंग पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। चिलचिलाती धूप और आसमान से बरसती आग के बीच यहाँ के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और मीलों दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।सरपंच और वन विभाग के बीच उलझा मामलाग्रामीणों ने जब इस भीषण जल संकट की शिकायत स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायत में की, तो पंचायत ने अपनी जिम्मेदारी से साफ पल्ला झाड़ लिया। ग्राम पंचायत अमाड़ के सरपंच का कहना है कि उक्त बोरिंग का खनन वन विभाग द्वारा कराया गया था। सरपंच के मुताबिक, "चूंकि बोरिंग वन विभाग ने खोदा था, इसलिए उसमें कोई भी खराबी आने पर उसे सुधारने या दोबारा बना कर देने की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की ही है।"सवालों के घेरे में जिम्मेदार तंत्रसरपंच के इस बयान और वन विभाग की उदासीनता के कारण पिछले 25 दिनों से समस्या जस की तस बनी हुई है। सरकारी विभागों की इस आपसी खींचतान और तालमेल की कमी का खामियाजा बड़ीपारा के मासूम ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।




