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स्कूलों में धार्मिक गतिविधियों को अनिवार्य किए जाने संबंधी आदेश की संवैधानिक समीक्षा की मांग
राजेश जगत की रिपोर्टर रायपुर/गरियाबंद। भीम रेजीमेंट छत्तीसगढ़ ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी उस आदेश पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसमें शासकीय विद्यालयों में गायत्री मंत्र सरस्वती वंदना, प्रार्थना श्लोक, दीप प्रज्वलन, सूर्य नमस्कार, योग मंत्र, राष्ट्रगान, महापुरुषों की जीवनी एवं अन्य गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। संगठन ने इस आदेश की संवैधानिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समीक्षा किए जाने की मांग की है। भीम रेजीमेंट छत्तीसगढ़ के युवा विंग के प्रदेश उपाध्यक्ष छबि साहू ने कहा कि भारत का संविधान देश को एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के रूप में स्थापित करता है। संविधान के अनुच्छेद 28 में स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों में किसी विशेष धर्म की शिक्षा अथवा धार्मिक उपासना को अनिवार्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विद्यालय शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन, मानवतावादी मूल्यों, समानता एवं संवैधानिक चेतना का विकास करना है। ऐसे में यदि किसी धार्मिक स्वरूप की गतिविधि को अनिवार्य बनाया जाता है, तो यह विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों एवं विचारधाराओं से आने वाले विद्यार्थियों की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है तथा शिक्षा के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर सकता है। श्री साहू ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 51(क)(ह) के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद तथा सुधार की भावना का विकास करे। इसलिए विद्यालयों में ऐसी शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो विद्यार्थियों को तार्किक, वैज्ञानिक एवं लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करे। भीम रेजीमेंट ने मांग की है कि राज्य शासन उक्त आदेश की पुनः समीक्षा कर यह सुनिश्चित करे कि किसी भी छात्र-छात्रा को उसकी इच्छा अथवा अभिभावकों की सहमति के बिना धार्मिक प्रकृति की गतिविधियों में शामिल होने के लिए बाध्य न किया जाए। साथ ही विद्यालयों में संविधान, विज्ञान, मानवता, समानता, बंधुत्व एवं राष्ट्रीय एकता पर आधारित शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी धर्म, आस्था या परंपरा का विरोध करना नहीं है, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त धर्मनिरपेक्षता, समान नागरिक अधिकारों और वैज्ञानिक चेतना की रक्षा करना है। भीम रेजीमेंट छत्तीसगढ़ शिक्षा के क्षेत्र में संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर आवाज उठाता रहा है "संविधान सर्वोपरि — शिक्षा वैज्ञानिक, समतामूलक और धर्मनिरपेक्ष हो"





