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₹1001 का सिलेंडर… रास्ते में बना ‘VIP पैकेज’!” “पर्ची का इंतज़ार 45 दिन, लेकिन ‘ब्लैक डिलीवरी’ ऑन टाइम!”

जिले के अमलीपदर और गोहरापदर इलाके में इन दिनों गैस सिलेंडर कोई घरेलू ज़रूरत नहीं, बल्कि ‘प्रीमियम प्रोडक्ट’ बन चुका है। फर्क बस इतना है कि यहां कोई ऐप नहीं, बल्कि पिकअप गाड़ी ही “डायरेक्ट डिलीवरी प्लेटफॉर्म” बन गई है। “किल्लत कम, कला बाज़ारी ज़्यादा—गांव में गैस का नया गणित” जहां आम उपभोक्ता 45 दिन तक पर्ची कटने का इंतज़ार करते-करते अपने चूल्हे की तरफ भावुक नज़रों से देखते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ खास ‘लकी ड्रा विजेता’ सीधे ₹1400 से ₹1500 में सिलेंडर घर बैठे पा रहे हैं। शर्त बस इतनी—पर्ची मत पूछो, रसीद भूल जाओ… और सवाल करने की गलती मत करना!आज गोहरापदर और आसपास के गांवों में बिंद्रा नवागढ़ के भारत गैस एजेंसी के पिकअप गाड़ी करीब 120-130 सिलेंडर लेकर ऐसे घूमती नजर आई, जैसे कोई शादी बारात में मिठाई बांट रहा हो। फर्क बस इतना कि यहां “मिठाई” की कीमत ₹1001 से बढ़कर ₹1500 हो चुकी थी। “देख सहेली ₹1500 ला… वरना तेरा सिलेंडर चला!” अब ज़रा गाड़ी के पीछे लिखी लाइन पर ध्यान दीजिए देख सहेली तेरा सजना चली…” लेकिन इलाके के लोगों ने इसे अपडेट कर दिया है— “देख सहेली ₹1500 ला… वरना तेरा सिलेंडर चली!” यानि अब प्यार नहीं, गैस सिलेंडर भी पैसे देखकर ही साथ देता है। ग्रामीणों का कहना है कि केवाईसी अपडेट नहीं, पर्ची नहीं, नाम एंट्री नहीं—इन सब ‘तकनीकी बहानों’ का ऐसा ताना-बाना बुना गया है कि उपभोक्ता खुद ही मजबूर होकर ब्लैक में खरीदने को तैयार हो जाए। और एजेंसी? वो तो बस “सेवा” दे रही है—थोड़ा प्रीमियम लेकर! सूत्र बताते हैं कि पहले सप्लाई कम होने की खबर आई… और अब अचानक “ओपन मार्केट” में सिलेंडर की बाढ़ आ गई। सवाल ये उठता है कि ये सिलेंडर आखिर कहां छुपे बैठे थे? क्या ये भी “रणनीतिक स्टॉक” था, जो सही मौके पर ‘लाभ’ के लिए निकाला गया? जब इस मामले में अधिकारियों से बात की गई, तो उनका साफ कहना है— ₹1001 से ज्यादा वसूली हो रही है तो जांच होगी, नोटिस भी जाएगा और जुर्माना भी लगेगा। लेकिन सवाल ये है कि जब तक जांच पूरी होगी… तब तक कितने “सजना” ₹1500 लेकर “चल” चुके होंगे? सरकार कहती है—“उपभोक्ताओं को राहत मिले।” एजेंसी कहती है—“हमें भी थोड़ा लाभ मिले!” और जनता कह रही है— “चूल्हा जले या जेब… दोनों एक साथ नहीं संभल रहे!” अब देखना ये है कि इस ‘गैस लीला’ पर कब ब्रेक लगता है… या फिर अगली बार गाड़ी के पीछे नया स्लोगन दिखे— “पहले पेमेंट, फिर सिलेंडर—यही है असली कैलेंडर

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