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छत्तीसगढ़ में सवाल उठाने पर कार्रवाई? सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आकांक्षा टोप्पो की गिरफ्तारी पर उठे गंभीर सवाल रायपुर।

छत्तीसगढ़ की चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आकांक्षा टोप्पो की गिरफ्तारी को लेकर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। आकांक्षा टोप्पो लंबे समय से सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से जुड़े मुद्दों को मुखरता से उठाती रही हैं और सत्ता से जवाबदेही की मांग करती रही हैं। आकांक्षा टोप्पो ने प्रदेश में खराब सड़कों की स्थिति, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली, बिजली संकट, शराब नीति जैसे मुद्दों पर लगातार सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और सीतापुर विधायक से जुड़े उस विवादित मामले पर भी आवाज़ उठाई थी, जिसमें एक दिव्यांग परिवार को उसकी ज़मीन से बेदखल किए जाने का आरोप सामने आया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सवाल करने के बजाय उनकी गिरफ्तारी क्यों की गई? आलोचकों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन जवाबदेह हैं, तो सवालों का उत्तर दिया जाना चाहिए था, न कि आवाज़ उठाने वालों पर कार्रवाई की जाए। राजनीतिक विश्लेषकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता से सवाल करना अब अपराध बनता जा रहा है, जबकि अपराधों और अव्यवस्थाओं पर कार्रवाई को लेकर सरकार की सुस्ती अक्सर चर्चा में रहती है। इस घटना को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया जा रहा है। विपक्ष और नागरिक संगठनों का कहना है कि यह “सुशासन” नहीं, बल्कि आलोचना से घबराई सरकार द्वारा असहमति की आवाज़ को दबाने की कोशिश है। उन्होंने मांग की है कि सरकार इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करे और यह सुनिश्चित करे कि लोकतंत्र में सवाल पूछने वालों को डराया या चुप नहीं कराया जाए। फिलहाल, आकांक्षा टोप्पो की गिरफ्तारी ने छत्तीसगढ़ में लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सत्ता की जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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