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धान तस्करी पर ‘शो ऑफ़ एक्शन’ या सिस्टम की आपसी जंग? मंडी सचिव की जब्ती पर पुलिस–राजस्व की घेराबंदी, पत्रकारों पर 420 की धमकी

उड़ीसा से धान आया कैसे? — जवाब खोजने के बजाय सवाल उठाने वालों पर ही झूठे केस करने की तैयारी! *तीनों विभागों की खींचतान में तस्करों की बल्ले बल्ले!* नाका, जांच और दावे… फिर भी जंगल–घाटी से रोज़ घुस रहा धान जीरो ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार ही बने ‘संदेह के घेरे’ में 100 बोरी धान की जब्ती बनी ‘विभागीय टकराव’ की कहानी मंडी विभाग मैदान में, पुलिस–राजस्व सवालों के घेरे में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होते ही तस्करों ने नए-नए रास्ते और नए-नए तरीके इजाद कर लिए हैं। सरकार के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में तो आया, लेकिन कार्रवाई से ज़्यादा विभागीय टकराव और क्रेडिट की होड़ सामने आने लगी है। उड़ीसा–छत्तीसगढ़ सीमा पर नाके, पहाड़ी कच्चे रास्तों पर निगरानी और अब तक करीब 1300 क्विंटल धान व 28 वाहन जब्त किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि अगर हर रास्ते पर निगरानी है, तो रोज़-रोज़ सीमावर्ती गांवों, जंगलों, खेतों और गोदामों में हजारों बोरी धान पहुंच कैसे रहा है? *अजीबोगरीब मामला*_जब कार्रवाई करने वाला ही संदेह के घेरे में आया बीती रात उड़ीसा–छत्तीसगढ़ सीमा के अंतिम छोर पर बसे कसेरसील गांव में पत्रकारों की सूचना पर लगभग 100 पैकेट लावारिस धान मिलने का मामला सामने आया। पत्रकारों द्वारा सूचना दिए जाने पर मंडी विभाग के सचिव खुद अपनी टीम के साथ कच्चे पहाड़ी रास्ते से पिकअप वाहन द्वारा मौके पर पहुंचे और मंडी अधिनियम के तहत धान जब्ती की कार्रवाई शुरू की। _ पहले 60 पैकेट, फिर 40 पैकेट धान को रजिस्टर्ड व्यापारी के पास सुरक्षित डंप कराने की प्रक्रिया शुरू हुई। *लेकिन यहीं से शुरू हुआ विभागीय टकराव* जब मंडी सचिव और उनकी टीम धान से लदी पिकअप लेकर घाटी से नीचे उतर रही थी, तभी पुलिस ने ‘गलत सूचना’ के आधार पर उसी वाहन को रोक लिया और थाने ले जाने की बात कही । मंडी सचिव द्वारा बार-बार स्पष्ट करने के बावजूद कि—“धान की जब्ती मंडी अधिनियम के तहत की जा रही है और इस धाम को हमारे रजिस्टर ट्रेडर्स के पास सुपुर्द नामा किया जाएगा" पुलिस और राजस्व विभाग ने गाड़ी को थाने ले जाने की ज़िद पकड़ ली। _थाने में ड्राइवर से पूछताछ _पहले ट्रिप की जानकारी मांगी गई _और चौंकाने वाली बात— _ पत्रकारों पर ही धान तस्करी कराने का शक जताया गया 420 की धमकी, कार्यवाही करने वाले और साथ देने वालों पर ही शक! स्थिति तब और गंभीर हो गई जब थाना प्रभारी द्वारा 420 जैसे गंभीर धाराओं की बात खुलेआम कही गई। जबकि सच्चाई यह है कि— _ सूचना पत्रकारों ने दी _कार्रवाई मंडी विभाग ने की _धान सरकारी रिकॉर्ड में जब्त हुआ फिर सवाल यह है कि तस्कर कहां हैं? या फिर जीरो ग्राउंड पर जाकर सच्चाई उजागर करना ही अब अपराध बन गया है? मंडी विभाग की अनोखी पहल, सराहना के काबिल जहाँ एक ओर कई विभाग कार्यालयों से बाहर निकलने में हिचकते दिखे, वहीं मंडी सचिव और उनके कर्मचारी खुद जोखिम उठाकर जंगल-पहाड़ी रास्तों से मौके तक पहुंचे, धान उठाया और कानूनी प्रक्रिया पूरी की। यह दिखाता है कि इच्छाशक्ति हो तो कार्रवाई संभव है। सबसे बड़ा सवाल जब हर नाके पर जांच है, तो धान रोज़-रोज़ अंदर आ कैसे रहा है? क्या जंगल काटकर बने घाटी रास्तों से हो रही तस्करी पर जानबूझकर आंख मूंदी जा रही है? क्या विभाग आपसी समन्वय के बजाय एक-दूसरे से क्रेडिट छीनने में लगे हैं? धान तस्करी पर लगाम लगाने के लिए न केवल नाके चाहिए, बल्कि नीयत और समन्वय भी चाहिए। जब तक राजस्व, पुलिस और मंडी विभाग एकजुट होकर मीडिया को सहयोगी मानकर काम नहीं करेंगे, तब तक तस्कर रास्ते बनाते रहेंगे—और सवाल पूछने वाले कटघरे में खड़े किए जाते रहेंगे।

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