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सड़क का टेंडर पास, जनता का धैर्य फेल
देवभोग – 32 गाँवों को जोड़ने वाली यह मुख्य सड़क हर बारिश में नदी बनने का ठेका खुद ले लेती है। टेंडर पास हो चुका है, कागज़ों में पुलिया बन भी चुकी होगी, मगर ज़मीनी हकीकत देखिए—लोग मोटरसाइकिल से नहीं, नाव से उतरने को तैयार हैं। पानी की लहरों पर तैरते दोपहिया, कंधे तक धोती चढ़ाए लोग और पीछे जाम में फँसा ट्रक, मानो प्रशासन को लाइव फ़्लड शो दिखा रहे हों। अधिकारी महोदय शायद फाइल के सूखने का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि सड़क रोज़ भीग-भीग कर “अंडरवॉटर वंडरलैंड” बन चुकी है। जनता का कहना है—“साहब, टेंडर पास कर दिया, धन्यवाद! पर हमें कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर पुल चाहिए।” अब सवाल ये है कि काम कब शुरू होगा? अगली बारिश में या अगले चुनाव में? शासन–प्रशासन को चाहिए कि वो इस बहते रास्ते की तस्वीर को सिर्फ़ सोशल मीडिया पर लाइक न करें, बल्कि जल्द से जल्द निर्माण शुरू कर, जनता को पानी-पानी होने से बचाएँ





