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10 गांवों के मंदागमूडा ग्रुप सभा राजगोंड समाज का ऐतिहासिक फैसला, नशे के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग । “ना दारू पियेंगे, ना बेचेंगे” – नशे को कह दिया अलविदा, शिक्षा और रोजगार को बनाया विकास की राह ।

मंदागमूडा ग्रुप सभा राजगोंड समाज के 10 गांवों की संयुक्त ग्रुप सभा में नशे के खिलाफ एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व निर्णय लिया गया। समाज ने सर्वसम्मति से नशा मुक्ति अभियान चलाने का फैसला किया और इसी कड़ी में 17 जनवरी 2026 को समाज की ओर से एक विशाल जन जागरूकता रैली निकाली गई। यह रैली मंदागमूडा से प्रारंभ होकर बुडगेलटप्पा तक निकाली गई, जिसमें समाज के हजारों पुरुष और महिलाओं ने भाग लिया। बाइक रैली के साथ-साथ अन्य वाहनों के जरिए समाज के लोग नशा मुक्ति के नारे लगाते हुए पूरे क्षेत्र में भ्रमण करते नजर आए। रैली के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया। रैली के दौरान जहां-जहां देसी शराब बनाए जाने की सूचना थी, वहां समाज के प्रतिनिधि पहुंचे और शराब बनाने वालों को सख्त चेतावनी दी गई। समाज ने स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया कि अब न तो शराब पी जाएगी और न ही शराब बेची जाएगी। समाज द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, शराब पीने या बनाने वालों को समाज से बहिष्कृत किया जाएगा। ऐसे लोगों को किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल नहीं किया जाएगा और न ही उनके साथ बहू-बेटी के रिश्ते रखे जाएंगे। इसके साथ ही समाज ने शिक्षा और रोजगार को प्राथमिकता देने का भी संकल्प लिया। समाज के सचिव लुदर पाथर ने अपने उद्बोधन में कहा कि नशे की वजह से समाज का विकास अवरुद्ध हो रहा है। यदि समाज को आगे के पंक्ति में है लाना है तो नशे को पूरी तरह छोड़ना होगा। इसी उद्देश्य से नशा मुक्ति अभियान शुरू किया गया है। वहीं समाज के कोषाध्यक्ष विजय मरकाम ने कहा कि आज़ादी के बाद सरकार द्वारा दी गई 5 लीटर देसी शराब बनाने की छूट ने आदिवासी समाज को नुकसान पहुंचाया है और गर्त में धकेल दिया है । अब समाज ने खुद फैसला लिया है कि नशे से दूर रहकर ही आगे बढ़ा जा सकता है। समाज की महिला सदस्य श्रुति सिंह ध्रुवा ने कहा कि आज सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण नशा है। शराब पीकर वाहन चलाने से लगातार एक्सीडेंट बढ़ रहे हैं। समाज ने निर्णय लिया है कि शराब बनाने वालों से किसी भी प्रकार का सामाजिक संपर्क नहीं रखा जाएगा। पूर्व ग्रुप अध्यक्ष इंद्र माझी ने कहा कि यह निर्णय समाज को नई दिशा देगा। यदि लोग नशा छोड़कर शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दें, तो समाज निश्चित रूप से तरक्की करेगा। इस अनोखी पहल की क्षेत्र के अन्य समाजों ने भी सराहना की है और मंदागमूडा ग्रुप सभा राजगोंड समाज के इस फैसले को नशा मुक्ति की दिशा में एक मिसाल बताया जा रहा है।

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